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Dal Singh Sarai News: अब्बी के जाने का गम उम्र भर रहेगा, तुफैल अहमद की भावुक पोस्ट ने किया भावुक

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | दलसिंहसराय के उमरचक (बल्लोचक) निवासी वरीय स्टाम्प वेंडर सोहैल अहमद उर्फ अच्छे बाबू के इंतकाल के बाद बेटे तुफैल अहमद की भावुक फेसबुक पोस्ट।

दलसिंहसराय, 7 सितंबर। दलसिंहसराय नगर परिषद क्षेत्र के उमरचक (बल्लोचक), वार्ड नंबर-1 निवासी सोहैल अहमद उर्फ अच्छे बाबू का 27 अगस्त को इंतकाल हो गया। वह दलसिंहसराय रजिस्ट्री ऑफिस में वरीय स्टाम्प वेंडर के रूप में कार्यरत थे। उनके निधन के बाद परिवार, रिश्तेदारों, परिचितों और शुभचिंतकों के बीच शोक का माहौल है।

अपने पिता के इंतकाल के बाद उनके बेटे तुफैल अहमद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर एक बेहद भावुक पोस्ट साझा की। इस पोस्ट में उन्होंने अपने वालिद की यादों, उनके प्यार, उनके साये और उनके साथ बिताए पलों को याद करते हुए अपने दिल का दर्द बयां किया है। तुफैल अहमद की यह भावुक अभिव्यक्ति पिता के प्रति उनकी गहरी मोहब्बत और लगाव को दर्शाती है।

तुफैल अहमद ने अपनी पोस्ट की शुरुआत ही इन शब्दों से की—“अब्बी के जाने का गम उम्र भर रहेगा।” उन्होंने लिखा कि घर तो रहेगा, मगर घर में शायद वह अपनापन नहीं रहेगा। जिस हाथ ने उन्हें थामकर चलना सिखाया था, आज उसी हाथ की गर्माहट को उनका दिल तरसता है।

एक बेटे के लिए पिता केवल परिवार के मुखिया नहीं होते, बल्कि वह जिंदगी के सबसे बड़े सहारे, मार्गदर्शक और हौसले का स्रोत होते हैं। पिता के चले जाने के बाद घर वही रहता है, परिवार वही रहता है, लेकिन पिता की आवाज और मौजूदगी की कमी हर पल महसूस होती है। तुफैल अहमद की पोस्ट में इसी दर्द की झलक दिखाई देती है।

उन्होंने लिखा कि “वालिद की कमी क्या होती है, ये उनसे पूछिए, जिनके सिर से वालिद का साया हमेशा के लिए उठ गया।” यह पंक्ति पिता को खोने के बाद महसूस होने वाले उस खालीपन को बयां करती है, जिसे शब्दों में पूरी तरह व्यक्त करना आसान नहीं होता।

तुफैल अहमद ने अपने वालिद को अपनी दुनिया बताते हुए लिखा कि वह शख्स चले गए, जो उनकी दुनिया थे। इसके बावजूद आज भी हर दुआ में सबसे पहले वही याद आते हैं। पिता के जाने के बाद उनकी यादें जिंदगी का हिस्सा बन जाती हैं और इंसान चाहकर भी उन्हें अपने दिल से अलग नहीं कर पाता।

भावुक पोस्ट में तुफैल अहमद ने अपने दिल का हाल साझा करते हुए लिखा कि अब किसके सामने अपने दिल की बात रखें, क्योंकि अब्बी के बाद कोई अपना-सा नहीं लगता। पिता और बेटे के रिश्ते की गहराई को व्यक्त करती यह बात सोशल मीडिया पर पढ़ने वालों को भी भावुक कर देने वाली है।

उन्होंने अपने वालिद के साये को याद करते हुए लिखा कि जब सिर पर वालिद का साया होता है तो दुनिया कितनी हसीन लगती है। लेकिन जब वही साया सिर से उठ जाता है तो जिंदगी में एक ऐसा खालीपन पैदा हो जाता है, जिसकी भरपाई संभव नहीं होती।

तुफैल अहमद की पोस्ट में वक्त को लेकर भी एक भावुक सवाल है। उन्होंने लिखा कि वक्त कहता है कि उन्हें भूल जाओ, लेकिन कैसे भूल जाएं उस शख्स को, जिसकी हर सांस में वह बसे हुए थे। पिता की यादें केवल पुरानी तस्वीरों या बीते हुए पलों तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में छोटी-छोटी बातों के साथ उनकी मौजूदगी महसूस होती रहती है।

उन्होंने अपने वालिद की आवाज सुनने की तड़प का भी जिक्र किया। लिखा कि “अब्बी, आपकी आवाज सुनने को दिल तरसता है, घर में सब कुछ है मगर आपके बगैर सब सूना है।” यह पंक्ति उस दर्द को सामने लाती है, जो किसी अपने के चले जाने के बाद घर की खामोशी में महसूस होता है।

तुफैल अहमद ने अपने वालिद के अंतिम समय को याद करते हुए लिखा कि एक दिन में उनकी सारी दुनिया उजड़ गई, जब उनके वालिद ने आखिरी बार आंखें बंद कीं। एक पिता के निधन को लेकर बेटे की यह भावुक अभिव्यक्ति बताती है कि उनके लिए सोहैल अहमद उर्फ अच्छे बाबू का स्थान कितना महत्वपूर्ण था।

अंत में उन्होंने पिता-पुत्र के रिश्ते की अमिटता को लेकर लिखा कि रिश्ता खून का था, इसलिए टूट नहीं सकता। वालिद दुनिया से चले गए, मगर दिल से कभी नहीं जाते।

सोहैल अहमद उर्फ अच्छे बाबू का सामाजिक और पेशेवर जीवन भी दलसिंहसराय से जुड़ा रहा। वह रजिस्ट्री ऑफिस दलसिंहसराय में वरीय स्टाम्प वेंडर के रूप में कार्यरत थे। उमरचक (बल्लोचक), वार्ड नंबर-1 में रहने वाले सोहैल अहमद के निधन की खबर से उनके परिचितों और शुभचिंतकों में शोक की लहर है।

उनके निधन के बाद बेटे तुफैल अहमद की यह भावुक पोस्ट पिता-पुत्र के उस रिश्ते को सामने लाती है, जिसमें पिता की मौजूदगी जिंदगी भर संतान के लिए सुरक्षा और सहारे का एहसास बनी रहती है। समय गुजरने के साथ इंसान जिंदगी में आगे बढ़ता है, लेकिन माता-पिता की यादें दिल में हमेशा जीवित रहती हैं।

सोहैल अहमद उर्फ अच्छे बाबू भले ही इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन उनके बेटे तुफैल अहमद की भावुक पंक्तियां यह एहसास कराती हैं कि एक पिता का स्थान संतान के दिल में कभी खाली नहीं होता।

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